होम जैसे वियतनाम में फंसा था अमेरिका, वैसे ही इजरायल परेशान! क्या है हमास का टनल वारफेयर
जैसे वियतनाम में फंसा था अमेरिका, वैसे ही इजरायल परेशान! क्या है हमास का टनल वारफेयर
ऐसा कहा जा रहा है कि इजरायल आने वाले कुछ दिनों में गाजा में बड़ी कर्रवाई को अंजाम देने वाला है। दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन इस समय इजरायल के दौरे पर हैं। उनके जाने के बाद गाजा में इजरायली सेना जमीनी आक्रमण शुरू कर सकती है।
इजरायल और हमास के बीच युद्ध 12वें दिन में प्रवेश कर गया है और तनाव कम होने का कोई संकेत नहीं दिख रहा है। ताकत की बात करें तो हमास और इजरायली रक्षा बलों के बीच बहुत असमानता है। इजरायली सेना हर मामले में हमास से कई गुना ताकतवर है। लेकिन इसके बावजूद, एक गुप्त हथियार है जिसका इस्तेमाल हमास घात लगाने के लिए कर सकता है और अपने आतंकियों को हथियारों की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए भी इसकी इस्तेमाल कर सकता है। हम बात कर रहे हैं खुफिया सुरंगों की।
यहूदी विद्रोह के दौरान भी हुआ था सुरंगों का इस्तेमाल
भूमिगत युद्ध या सुरंग युद्ध कोई नया चलन नहीं है। ऐसा कहा जाता है कि पुरानी सभ्यताओं के दौरान भी सुरंगों का इस्तेमाल दुश्मन को घेरने या खुद को सुरक्षित निकालने आदि के लिए किया जाता था। आधुनिक युद्ध में भी सुरंगों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है। 66 से 70 ईस्वी तक रोमन सेनापतियों के खिलाफ महान यहूदी विद्रोह के दौरान भी सुरंगों के इस्तेमाल का जिक्र मिलता है। आधुनिक युग की बात करें तो वियतनाम युद्ध के दौरान कम्युनिस्ट वियतनाम कांग्रेस ने अमेरिका के छक्के छुड़ा दिए थे। वियतनाम युद्ध के दौरान सुरंगों का खूब इस्तेमाल हुआ था जिससे अमेरिका को भारी जान-माल का नुकसान हुआ। इसके अलावा, तोरा बोरा की लड़ाई के दौरान अफगानिस्तान में अल कायदा से लड़ाई में भी सुरंगों ने बड़ी भूमिका निभाई। सुरंगों के इस जाल को भूलभुलैया युद्ध भी कहते हैं।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, 20 साल लंबे वियतनाम युद्ध के दौरान, वियत कांग्रेस गुरिल्लाओं ने अपने 'हिट एंड एस्केप' फार्मूले से शक्तिशाली अमेरिका को नुकसान पहुंचाया। इन गुरिल्ला रणनीति में उन्हें जिस चीज से मदद मिली, वह न केवल आश्रय प्रदान करने के लिए बल्कि अमेरिकी नेतृत्व वाली सेनाओं को धोखा देने के लिए बनाई गई खुफिया सुरंगें थीं। सुरंगों का निर्माण अमेरिकी वायुसेना और हेलीकॉप्टर निगरानी मिशनों से छिपने के लिए किया गया था। क्यू ची में, वियतनाम की पूरी सेना छिप सकती थी, प्रशिक्षण ले सकती थी और एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जा सकती थी वो भी बिना अमेरिका को भनक लगे। क्योंकि वियतनाम आर्मी ने एक पूरा सुरंग सिस्टम बनाया हुआ था। ये वियत कांग गुरिल्ला ऐसी सुरंगों में छिप जाते थे और दुश्मन पर घात लगाने के लिए निकलते थे और फिर बिना पहचाने वापस चले जाते थे।
हमास ने गाजा में बिछाया सुरंगों का पूरा जाल
माना जाता है कि हमास ने भी गाजा में ऐसी ही सुरंगों का पूरा जाल बिछा रखा है। ऐसे कई वीडियो भी सामने आए हैं जिनमें हमास से आतंकी सुरंग के अंदर से काम करते दिख रहे हैं। हमास नेता याह्या सिनवार ने दावा किया था कि गाजा में सुरंग नेटवर्क 500 किमी लंबा है और 2021 में इजरायल रक्षा बलों द्वारा केवल 5 प्रतिशत ही नष्ट किया गया था। 2007 में गाजा पट्टी पर नियंत्रण करने के बाद से, हमास ने शहर के भीतर और गाजा-इजरायल सीमा के पार सुरंग नेटवर्क का विस्तार करने के लिए बड़ा काम किया है। कई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जमीनी हमले में, इजरायल अपनी मारक क्षमता खो देगा और उसे दुश्मन के इलाके में दुश्मन से लड़ना होगा।
विस्तृत नेटवर्क के कारण, इजरायली सेना सुरंगों को 'गाजा मेट्रो' कहती है। इन सुरंगों के पिछले वीडियो में अंदर रोशनी लगी हुई और हथियारों और गोला-बारूद को छिपाने के लिए पर्याप्त जगह दिखाई देती है। दीवारें सीमेंट से बनी हैं। हमास पर आरोप लगते रहे हैं कि उसने गाजा को मिलने वाली मानवीय सहायता से बुनियादी ढांचे का निर्माण किया है। हाल ही में हमास ने कथित तौर पर एक वीडियो जारी किया था जिसमें उसके आतंकी जमीन में लगे पानी के पाइप को निकालकर उनसे रॉकेट बनाते दिख रहे हैं।
प्राचीन प्रथा हैं गाजा की सुरंगें
इजरायल को निश्चित रूप से इस युद्ध से पहले गाजा सुरंगों के बारे में पता था। यह एक प्राचीन प्रथा है। अपनी पुस्तक, गाजा: ए हिस्ट्री में, जीन-पियरे फिलिउ ने 332 ईसा पूर्व में सिकंदर महान की इस भूमध्यसागरीय शहर की घेराबंदी के दौरान "गाजा की ढीली उपभूमि का पहला ऐतिहासिक संदर्भ" का वर्णन किया है। गाजा उस समय फारसी शासन के तहत था। फिलिउ लिखते हैं कि सिकंदर को उम्मीद थी कि उसे आसानी से जीत हासिल हो जाएगी। लेकिन "गाजा की घेराबंदी में उसे 100 दिन लगे और इसमें निष्फल हमले और सुरंग खोदना शामिल था।" जब गाजा अंततः हार गया, तो सिकंदर क्रोधित हो गया और प्रतिशोधात्मक हिंसा पर उतारू हो गया।
कुछ साल पहले फिलिस्तीनियों ने दक्षिण में मिस्र तक सुरंग खोदकर गाजा पट्टी पर यात्रा, आयात और निर्यात को लेकर इजरायली नियंत्रण को खत्म कर दिया था। कारें, गायें और सिगरेटें उस रास्ते से आईं जिन्हें आम तौर पर तस्करी सुरंगें कहा जाता था। हालांकि 2006 में सत्ता में आने के बाद हमास ने जितना संभव हो सका उन सुरंगों पर टैक्स लगाया। इस बीच मिस्र के सस्ते गैसोलीन ने गाजा को रोशनी देना जारी रखा वो भी तब जब इजरायल ईंधन बहुत महंगा हो गया था। यह सब उसी सुरंग से आता था। उन व्यावसायिक सुरंगों से हथियार और कभी-कभी लोग भी यात्रा करते थे।
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