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समाचारदेश Alert Star Digital Team Dec 31, 2024 09:44 PM

2025 में बीजेपी को मिलेगा नया अध्यक्ष, कांग्रेस के सामने संगठन मजबूत करने का टारगेट

2025 में बीजेपी को मिलेगा नया अध्यक्ष, कांग्रेस के सामने संगठन मजबूत करने का टारगेट

2025 में बीजेपी को मिलेगा नया अध्यक्ष, कांग्रेस के सामने संगठन मजबूत करने का टारगेट

साल 2024 अलविदा हो रहा है और बुधवार को सूरज की किरण के साथ नए साल की दस्तक होगी. 2024 में लोकसभा चुनाव और सात राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं. दक्षिण भारत से लेकर पूर्वोत्तर और उत्तर भारत के राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं. भारत के सियासी परिदृश्य के लिहाज से 2024 का साल चुनावी साल के तौर पर रहा तो 2025 का साल राजनीतिक दलों के संगठन का चुनाव वाला रहेगा. बीजेपी से लेकर कांग्रेस और सीपीएम जैसे दलों को संगठनात्मक चुनाव से गुजरना होगा.साल 2025 में बीजेपी को नए राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने के साथ-साथ कई राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव करना है. बीजेपी में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनावी प्रक्रिया के लिए काम शुरू कर दिया है. सीताराम येचुरी की निधन हो जाने के बाद सीपीएम महासचिव का पद खाली है. सीपीएम की सेंट्रल कमेटी की बैठक अप्रैल 2025 में प्रस्तावित है, जिसमें सीताराम येचुरी के सियासी उत्तराधिकारी यानि नए महासचिव का चयन किया जाएगा. कांग्रेस नेतृत्व ने बेलगावी में अपने संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ पार्टी रवैये में बड़ा बदलाव लाने का प्रस्ताव पास किया है, जिसके लिए 2025 का टारगेट रखा है.बीजेपी को मिलेगा नए साल में अध्यक्ष
नए साल में बीजेपी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष भी मिलेगा. बीजेपी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा, इस पर तमाम तरह के सियासी कयास लग रहे हैं. हर रोज एक नया नाम चर्चा के केंद्र में आ रहा, लेकिन बीजेपी अपने पत्ते नहीं खोल रही है. बीजेपी में संगठन चुनाव की प्रक्रिया चल रही है, जिसके तहत प्रदेश में संगठन बनाए जा रहे हैं. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा हैं, उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें एक्सटेंशन दिया गया है. बीजेपी की यह नीति है कि कोई भी नेता, सत्ता या संगठन में से एक पद पा सकता है. लिहाजा, नड्डा की जगह नए अध्यक्ष की नियुक्ति होनी है. माना जा रहा है कि 15 जनवरी के बाद बीजेपी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलेगा, जिसके लिए कई नामों की चर्चा है. बीजेपी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद नई टीम का गठन किया जाएगा.
बीजेपी संगठन में होगा बड़ा बदलाव
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने के साथ-साथ पार्टी के सबसे अहम संगठन महासचिव पद पर नियुक्ति होनी है. बीजेपी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के बाद संगठन महासचिव सबसे अधिक ताकतवर माना जाता है. बीएल संतोष बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव हैं और उनका कार्यकाल पूरा हो चुका है. अब पार्टी नए साल में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ नए संगठन महासचिव की नियुक्ति करनी है. बीजेपी में संगठन महासचिव को संगठन महामंत्री भी कहा जाता है. केंद्र और प्रदेश में संगठन महामंत्री संघ के द्वारा भेजे जाते हैं. ये संघ और भाजपा में समन्वय का काम करते हैं. भाजपा में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री आरएसएस का वरिष्ठ प्रचारक होता है, जिसे संघ के द्वारा बीजेपी में भेजा जाता है.
बीजेपी अध्यक्ष और संगठन महामंत्री के साथ कई राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति होनी है. यूपी में भूपेंद्र चौधरी की जगह नया प्रदेश अध्यक्ष चुना जाना है, जिसके लिए कई नाम चर्चा में है. महाराष्ट्र के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले फडणवीस सरकार में राजस्व मंत्री बन गए हैं, जिसके चलते अब यहां पर पार्टी को नए अध्यक्ष की नियुक्ति करनी होगी. इसके अलावा मुंबई बीजेपी अध्यक्ष आशीष सलार भी फडणवीस सरकार में मंत्री बन गए हैं, जिनके जगह भी नए अध्यक्ष का चुनाव करना है. झारखंड में मिली करारी हार के बाद प्रदेश अध्यक्ष पद से बाबूलाल मरांडी ने इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद नए अध्यक्ष की तलाश है. गुजरात बीजेपी अध्यक्ष सीआर पाटिल को केंद्र में मंत्री बनाए जाने के बाद अब उनकी जगह अध्यक्ष की नियुक्ति होनी है. मध्य प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा का कार्यकाल पूरा हो चुका है तो पश्चिम बंगाल में नए अध्यक्ष का चुनाव होना है.
येचुरी का कौन होगा CPM में उत्तराधिकारी
सीताराम येचुरी के निधन के बाद अब मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) अपने अगले महासचिव की तलाश की प्रक्रिया से गुजर रही है. प्रकाश करात को सीपीएम का कार्यकारी महासचिव जरूर बनाए रखा गया है, लेकिन स्थाई तौर पर सीपीएम को महासचिव 2025 में मिलेगा. मदुरै में 2025 में दो से छह अप्रैल के बीच सीपीएम सेट्र्ल कमेटी की बैठक प्रस्तावित है. सीपीएम में महासचिव ही सर्वोच्च पद होता है और पोलित ब्यूरो के सदस्य सलाहकार के रूप में काम करते हैं. सीपीएम महसचिव का चुनाव सेंट्रल कमेटी की बैठक में पोलित ब्यूरो के सदस्यों के द्वारा किया जाता है.
केरल में साल 2021 में विधानसभा चुनाव है, देश में एकलौता राज्य हैं, जहां पर लेफ्ट का कब्जा है. ऐसे में सीपीएम को ऐसे अध्यक्ष की तलाश है, जो पार्टी के बिखरते हुए सियासी जनाधार को वापस ला सके. इसके अलावा पार्टी के खोए हुए विश्वास को हासिल कर सके. वामपंथी दल पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा जैसे राज्यों की सत्ता से बेदखल हो चुकी हैं और केरल की एकलौता राज्य बचा हुआ. केरल में भी कांग्रेस के अगुवाई वाले यूडीएफ से सीपीएम को कड़ी चुनौती मिल रही है. देखना है कि सीताराम येचुरी की जगह कौन सीपीएम का महासचिव होगा?
नए साल में कांग्रेस संगठन बदलाव से गुजरेगी
कांग्रेस कर्नाटक के बेलगावी में कार्यसमिति की बैठक में तय किया है कि 2025 का साल पार्टी के संगठन को खड़े करने का है. 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन से जो बढ़त हासिल की थी, वो साल के खत्म होते-होते हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र चुनाव में खराब प्रदर्शन से गंवा दिया है. कांग्रेस की हार के पीछ सबसे अहम वजह संगठन कमजोर होना. इसीलिए कांग्रेस ने तय किया है कि साल 2025 में संगठन में बदलाव को अमलीजामा पहनाने का काम करेगी. कांग्रेस को अपने संगठन को भी मजबूत करना होगा. कांग्रेस’संविधान बचाओ राष्ट्रीय पद यात्रा’निकालेगी, जो 26 जनवरी 2025 से शुरू होगी और 2026 में 26 जनवरी को खत्म होगी.

बेलगावी की बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा था कि 2025 कांग्रेस के लिए संगठन का वर्ष है, इसलिए ‘संगठन सृजन कार्यक्रम’ चलाएगी, जिससे संगठन मजबूत हो. उन्होंने कहा था कि ये कार्यक्रम ब्लॉक, मंडल, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर चलेगा. जय बापू, जय भीम, जय संविधान अभियान के जरिए पार्टी अभियान चलाकर खुद को मजबूत करने की रणनीति बनाई है.

इस अभियान की शुरुआत 27 दिसंबर, 2024 में बेलगावी की रैली से होनी थी, लेकिन पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के निधन के चलते ये टल गया है. माना जा रहा है कि नए साल में कांग्रेस अपने अभियान को शुरू करेगी, 26 जनवरी, 2025 को भीमराव आंबेडकर के जन्म स्थान महू, मध्य प्रदेश में समापन होगा.

कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती जहां देश के मुद्दों को लेकर जमीन पर संघर्ष की भी रहेगी तो वहीं दूसरी ओर तेलंगाना, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में अपने सरकार को बचाए रखने की होगी. इतना ही नहीं कांग्रेस दिल्ली में अपना खाता खोलने और बिहार में अपने पुराने मुकाम को हासिल करनी की भी चुनौती होगी. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को अध्यक्ष बने हुए दो साल हो रहे हैं, लेकिन अभी तक अपनी टीम नहीं बना सके. ऐसे में अगर संगठन को नए सिरे से मजबूत करना है तो कांग्रेस को इसके लिए सख्त फैसले लेने होंगे. पार्टी नेतृत्व ने अधिवेशन में आए कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि संगठन में बड़े बदलाव का वह इस बार सिर्फ वादा नहीं कर रहा है बल्कि इस पर अमल किया जाएगा.

कांग्रेस इसी को लेकर वर्षों से संतुलन बनाने की कोशिश में लगी है और इसी वजह से बदलाव के फैसले को टालती रही है, लेकिन शीर्ष नेतृत्व का इस सिलसिले में लापरवाह रवैया पार्टी के अंदर नाराजगी बढ़ा रहा है. कांग्रेस के अधिकतर नेता मानते हैं कि पार्टी के सामने सबसे बड़ी समस्या यही है. पिछले कई वर्षों से कांग्रेस ने बोल्ड फैसले नहीं लिए हैं. 2022 में राजस्थान के उदयपुर चिंतन शिविर में भी पार्टी ने बदलाव के नाम पर कई बड़े ऐलान किए थे, लेकिन उनमें से किसी पर अमल नहीं हुआ. जब राहुल गांधी की जगह मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस की कमान संभाली, उसके बाद भी बड़े बदलाव की उम्मीद अधूरी रह गई. ऐसे में क्या साल 2025 में कांग्रेस बोल्ड रिफॉर्म का कदम उठा पाएगी?

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