होम पहले अपने, अब सहयोगियों का छूटा साथ… संसद में अडानी मसले पर क्या अलग-थलग पड़े राहुल गांधी?

समाचारदेश Alert Star Digital Team Dec 2, 2024 09:18 PM

पहले अपने, अब सहयोगियों का छूटा साथ… संसद में अडानी मसले पर क्या अलग-थलग पड़े राहुल गांधी?

पहले अपने, अब सहयोगियों का छूटा साथ… संसद में अडानी मसले पर क्या अलग-थलग पड़े राहुल गांधी?

पहले अपने, अब सहयोगियों का छूटा साथ… संसद में अडानी मसले पर क्या अलग-थलग पड़े राहुल गांधी?

उद्योगपति गौतम अडानी के मुद्दे पर क्या नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी धीरे-धीरे अकेले पड़ते जा रहे हैं? यह सवाल दो वजहों से चर्चा में है. पहली वजह अडानी मसले पर कांग्रेस के भीतर ही बड़े नेताओं की चुप्पी तो दूसरी वजह इंडिया गठबंधन के दलों का इस मुद्दे से किनारा करना है.वो भी तब, जब संसद के भीतर राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के सांसद हंगामा कर रहे हैं.
अडानी पर कांग्रेस के बड़े नेता साइलेंट
गौतम अडानी की कंपनी पर अमेरिका में मामला दर्ज होने के बाद राहुल गांधी के नेतृत्व में कई नेता सरकार पर हमलावर हैं, तो वहीं पार्टी के दिग्गज इस पर चुप्पी साधे हुए हैं. इस मसले पर जिन नेताओं की चुप्पी चर्चा में है, उनमें अशोक गहलोत, भूपिंदर सिंह हुड्डा, कमलनाथ जैसे बड़े नाम शामिल हैं.कमलनाथ, भूपिंदर हुड्डा और अशोक गहलोत पूर्व में मुख्यमंत्री रहे हैं और पार्टी के भीतर दिग्गज नेताओं में इनकी गिनती होती है. इन 3 के अलावा जिन नेताओं ने अडानी मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है, उनमें अजय माकन (कोषाध्यक्ष), जितेंद्र सिंह (महासचिव), राजीव शुक्ला (प्रभारी), भरत सोलंकी (प्रभारी), सुखजिंदर सिंह रंधावा (प्रभारी) का नाम प्रमुख हैं.इसके अलावा देवेंद्र यादव ( प्रभारी), सुखपाल सिंह खैरा (किसान कांग्रेस, अध्यक्ष) गुलाम अहमद मीर (प्रभारी), मुकुल वासनिक (महासचिव), दीपादास मुंशी (महासचिव), मोहन प्रकाश (प्रभारी), अधीर रंजन चौधरी, अभिषेक मनु सिंघवी, दिग्विजय सिंह (पूर्व मुख्यमंत्री) और पी चिदंबरम (पूर्व वित्त मंत्री) जैसे दिग्गज नेता भी इस मुद्दे पर मुखर नहीं हैं.कांग्रेस के भीतर इस बात की चर्चा है कि आखिर ये नेता इतने बड़े मुद्दों पर भी चुप क्यों हैं? हालांकि, पहले भी कई बड़े मुद्दों पर राहुल अलग-थलग पड़ चुके हैं. 2019 में राफेल मुद्दे पर राहुल हमलावर थे, लेकिन उस वक्त उन्हें बड़े नेताओं का साथ नहीं मिला था.
एक-एक कर सहयोगी भी छोड़ रहे साथ
अडानी मुद्दे पर एक-एक कर इंडिया गठबंधन के सहयोगी भी राहुल गांधी का साथ छोड़ रहे हैं. पहले शरद पवार इस मसले पर अपना स्टैंड साफ कर चुके हैं. शरद पवार की पार्टी अडानी मसले पर न तो विरोध कर रही है और न ही कुछ बोल रही है. पवार के पास लोकसभा में कुल 8 सांसद हैं.इसी तरह तृणमूल ने अडानी मसले पर खुद को अलग कर लिया है. सोमवार को राहुल गांधी की बैठक में तृणमूल के सांसद नहीं पहुंचे. आमतौर पर पहले ऐसा नहीं होता था. तृणमूल का कहना है कि किसी एक व्यक्ति के मुद्दे पर संसद को बाधित करना गलत है.2023 में भी गौतम अडानी के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस ने अपना समर्थन कांग्रेस से ले लिया था. टीएमसी ने उस वक्त भी जनहित को मुद्दा बनाते हुए इस पर कांग्रेस की आलोचना की थी.टीएमसी संसद को जनहित के मुद्दे पर घेरने की पक्षधर है. संसद के बीच सत्र में जिस तरह से टीएमसी ने स्टैंड लिया है, उसे राहुल के लिए झटका कहा जा रहा है. इंडिया गठबंधन के भीतर तृणमूल तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है.समाजवादी पार्टी भी गौतम अडानी के मुद्दे पर मुखर नहीं है. हाल ही में एक प्रेस वार्ता में अखिलेश यादव से जब इसको लेकर सवाल पूछा गया तो उनका जवाब था- और भी बड़े मसले हैं, इस पर सवाल पूछिए.समाजवादी पार्टी भी गौतम अडानी के मुद्दे पर तटस्थ रवैया अपना रही है, जो सियासी तौर पर राहुल के लिए सही संकेत नहीं है. लोकसभा में संख्या के लिहाज से समाजवादी पार्टी तीसरे नंबर की पार्टी है. सपा के पास लोकसभा के 37 सांसद हैं.पूरे मसले पर हंगामे के बीच केरल के मुख्यमंत्री और सीपीएम के कद्दावर नेता पी विजयन ने अडानी समूह के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया है. विजयन के फैसले लेने की टाइमिंग चर्चा में है.
2023 में 3 तो 2024 में 5 दिन संसद ठप्प
2023 के बजट सत्र के दौरान हिंडनबर्ग की एक रिपोर्ट आई थी, उस वक्त इस मुद्दे को लेकर करीब 3 दिन तक संसद नहीं चल पाई थी. संसद में अडानी के मसले पर उस वक्त भी खूब हंगामा हुआ था. इस बार भी ऐसा देखने को मिल रहा है.गौतम अडानी मसले को लेकर अब तक संसद की 5 दिन की कार्यवाही ठप्प हो चुकी है. कांग्रेस के सांसद जिस तरीके से मुखर हैं, उससे आगे संसद की कार्यवाही सुचारु ढंग से चले, इसकी गुंजाइश कम दिख रही है.
 

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